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TitleHindi Book-Patanjali Yogsutra Bhaag 1
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ओशो ऩतंजलर मोगसूत्र

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Page 123

खोरनत भत! मह ्‍मतदत अच्छत हो क उसप सहह ‍मक्‍त कप ऩतस रप जतओ जो इन सजों कप फतयप भें जतनतत होव रय फड़स तो एक
ससधस मंत्रय नत ह जफ क भन इतनस फड़स जािर मतं्रय नत ह व तो इसप अऩनप सप कबस खोरनत भत, ‍मों क जो क्छ त्भ कयतप हो, गरत
होगतव

कबस—कबस मह होतत ह क त्म्हतयह घड़स खयतफ हो जततस ह , तो त्भ फस इसप ाहरत दपतप हो रय मह रनप रगतस ह कंत् मह कोई
ल ऻतिनक कौशर नहहं ह व कई फतय मह होतत ह क त्भ क्छ कयतप हो, रय कप लर बतग्मलश, संमोगलश त्म्हें रबुतसत होतत ह क क्छ
घि यहत ह व ऩय त्भ लसध ध नहहं फन गमप होव रय अगय मह एक फतय घि गमत ह तो इसप पय भत आजभतनत, ‍मों क अगरह फतय
त्भ घड़स को झिकत दो, तो शतमद मह हभपशत कप लरए फंद हो जतमपव मह घिस को झिकप दपनत कोई रलऻतन नहहं ह व

संमोगों (ऐ‍सिेंट्स) ध लतयत भत आगप फढ़ोव अन्शतसन फ तल कत एक उऩतम हह ह ; संमोगों ध लतयत नहहं फढ़ोव ग्रु कप सतथ आगप फढ़ो, जो
जतनतत ह क लह ‍मत कय यहत ह व जो जतनतत ह अगय क्छ गरत हो जततत ह , रय जो त्म्हें सम्मक भतगप ऩय रत सकतत ह व ग्रु, जो
त्म्हतयप अतसत कप रबुित सजग होतत ह रय जो त्म्हतयप बरलष्म कप लरए बस जतगरूक होतत ह ; जो त्म्हतयप अतसत रय बरलष्म को एक
दसूयप सप जोड़ सकतत ह व

इसलरए बतयतसम लशऺत भें ग्रुओ ंऩय इतनत ्‍मतदत जोय ह व लप जतनतप थपव रय जो लप कहतप थप, उसकत ठऺक—ठऺक लहह अथप होतत थतव
‍मों क कोई इतनत ्‍मतदत जािर मंत्र नहहं होतत क्जतनत क भतनल—भनव कोई कंपमूिय इतनत जािर नहहं होतत ह ज सत क भन्ष्म
कत भनव

आदभस अबस तक भन कप ज सस कोई सज रलकलसत कयनप रतमक नहहं ह्आ ह व रय भैं नहहं सभझतत क मह कबस रलकलसत होनप बस
लतरह ह व कौन रलकलसत कयपगत इसप? अगय भतनल—भन कोई सज रलकलसत कय सकप , तो मह हभपशत िनम्नतय रय कभतय हह होनस
ताहए, उस भन सप जो इसप िनलभपत कयतत ह व कभ सप कभ एक फतत तो िनक्च त ह क जो क्छ बस भतनल—भन िनलभपत कयतत ह , लह
िनलभपत क ह्ई सज भतनल—भन कत िनभतपण नहहं कय सकतसव तो भतनल—भन सलतपश्रधक उच् फनत यहतत ह , सफसप उत्कृष्ि ढंग क
जािर मतं्रय नतव

क्छ भत कयो भतत्र क्जऻतसत कप कतयण, मत लसपप इससलरए क दसूयप उसप कय यहप हैंव दहक्षऺत हो जतओ रय पय उसकप सतथ आगप फढ़ो,
जो भतगप को ठऺक सप जतनतत हो; लयनत ऩरयणतभ ऩतगरऩन हो सकतत ह व मह ऩहरप घि ्कत ह , रय कफरक्र महह अबस बस घि यहत ह
फह्त सप रोगों कोव

ऩतंजलर संमोग भें, एक्‍सिेंट्स भें रलचलतस नहहं कयतपव लप ल ऻतिनक स्‍मल्‍थत भें रलचलतस कयतप हैंव इसलरए लप एक—एक यण आगप
फढ़तप ह व रय लप इन दो फततों को अऩनत आधतय फनत रपतप हैं व ल यतग्म—इच्छतयाहततत रय अभ्मतस—सतत, फोधऩूणप आतंरयक अभ्मतसव
अभ्मतस सतधन ह रय ल यतग्म ह सतध्मव इच्छतरलहहनतत ह सतध्म रय सतत, फोधऩूणप अभ्मतस ह सतधनव

कंत् सतध्म आयंब होतत ह कफरक्र आयंब सपव रय अंत िछऩत यहतत ह आयंब भेंव लृऺ िछऩत ह्आ ह फसज भें, इसलरए आयंब भें हह
गलबपत ह अंतव इससलरए ऩतंजलर कहतप हैं क इच्छतयाहततत क आयंब भें बस जरूयत होतस ह व आयंब कप बसतय हह ह अंत रय अंत कप
बसतय बस आयंब होगतव

ग्रु बस, जफ क लह लसध ध हो ्कत हो, ऩूणप हो ्कत हो, पय बस लह अभ्मतस जतयह यखतत ह ! मह असंगत रगपगत त्म्हें तोव त्म्हें
अभ्मतस कयनत ऩड़तत ह ‍मों क त्भ आयंब ऩय हो रय रक्ष्म उऩरब्ध ह्आ नहहं ह , रप कन जफ रक्ष्म उऩरब्ध बस हो जततत ह , तो बस
अभ्मतस जतयह यहतत ह व अफ मह सहज ्‍लतबतरलक हो जततत ह , ऩय मह फनत यहतत ह व मह कबस थभतत नहहंव मह थभ सकतत नहहं,
‍मों क अंत रय आयंब दो सजें नहहं हैंव अगय लृऺ ह फसज भें, तो फसज पय लृऺ भें रत आमपगतव

कसस नप फ्ध ध सप ऩूछत—उनकप लशष्मों भें सप एक ऩणूपकतचमऩ, उसनप ऩूछत, ‘हभ दपखतप हैं, बिप, क आऩ अफ तक बस एक शि्नक्च त
अन्शतसन कत ऩतरन कयतप ह व’

फ्ध ध पय बस एक िनक्च त अन्शतसन ऩय र यहप थपव लप एक स्िनक्च त ढंग सप रतप, लप एक िनक्च त ढंग सप फ ठतप, लप जतगरूक ह्ए
यहतप, लप िनक्च त बो्‍म ऩदतथप हह खततप, लप िनक्च त ढंग सप ‍मलहतय कयतप—हय सज अन्शतसनऩूणप जतन ऩड़तसव

तो ऩूणपकतचमऩ नप कहत, ‘आऩ सख्ध ध हो ्कप हैं, कंत् हभ अन्बल कयतप हैं क तफ बस आऩ एक स्िनक्च त अन्शतसन को यखप ह्ए
हैंव’ फ्ध ध फोरप, ‘मह इतनत ्‍मतदत ऩकत रय गहयत हो ्कत ह क अफ भैं इसकप ऩसछप नहहं र यहत हंूव मह भपयप ऩसछप र यहत ह व मह
एक छतमत फन ्कत ह व भ्झप जरूयत नहहं इसकप फतयप भें सो नप क व लह ह महतंव सदत ह व मह छतमत फन ्कत ह व’

अतव अन्त ह आयंब हह भें, रय आयंब बस फनत ह्आ होगत अंत भेंव मप दो सजें नहहं हैं, फक््क दो छोय हैं एक हह घिनत कप व



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ऩॊतजलर: मोग–सूत्र–(बाग–1) प्रवचन–11
सभाधध का अथश—प्रवचन—ग् मायह





मोगसूत्र:
रलतकप रल तयतनदतक््‍भततन्गभतत्सरबुऻतत्वव १७वव

सप्रऻात सभाधध वह सभाधध है जो पवतकश , पवचाय, आनॊद औय अप्स्भता के बाव से मुक् त होती है।
रलयतभरबुत्ममतथ्मतसऩूलपव सं्‍कतयशपषोवन्म ववव १८वव

असॊप्रऻात सभाधध भें सायी भानलसक किमा की सभाप्तत होती है औय भन केवर अप्रकट सॊस्कायों को धायण ककमे यहता है।
बलरबुत्ममो रलदपहरबुकृितरमतनतभ वव ११वव

पवदेदहमो औय प्रकृनतरमों को असॊप्रऻात सभाधध उऩरब्ध होती है क्मोंकक अऩने पऩछरे ज्ऩ भें उन्होंने अऩने शयीयों के साथ तादात्‍थ
फनाना सभातत कय ददमा था। वे कपय जन्भ रेते हैं क्मोंकक इच्छा के फीज फने यहते हैं।

िध धतलसमप्‍भृितसभतश्रधऩूलपकइतयपषतभ वव २०वव
दसूये जो असॊप्रऻात सभाधध को उऩरब्ध होते हैंवे श्रद्धा, वीमश (प्रमत्‍न), स्भनृत, सभाधध (एकाऩता) औय प्रऻा (पववेक) के द्वाया उऩरब्ध

होते हैं।
ऩतंजलर सफसप फड़प ल ऻतिनक हैं अंतजपगत कप व उनक ऩहं् एक ल ऻतिनक भन क ह व लप कोई करल नहहं ह व रय इस ढंग सप लप फह्त
कफयरप हैंव ‍मों क जो रोग अंतजपगत भें रबुलपश कयतप हैं, रबुतमव सदत करल हह होतप हैंव जो फाहजपगत भें रबुलपश कयतप हैं, अ‍सय हभपशत
ल ऻतिनक होतप हैंव

ऩतंजलर एक दर्पब ऩ्ष् ऩ हैंव उनकप ऩतस ल ऻतिनक भक््‍तष्क ह , रप कन उनक मतत्रत बसतयह ह व इससलरए लप ऩहरप रय अंितभ ल न फन
गमपव लप हह आयंब हैं रय लप हह अंत हैंव ऩतं हजतय लषों भें कोई उनसप ्‍मतदत उन्नत नहहं हो सकतव रगतत ह क उनसप ्‍मतदत उन्नत
ह्आ हह नहहं जत सकततव लप अंितभ ल न हह यहेंगपव ‍मों क मह जोड़ हह असंबल ह व ल ऻतिनक दृक्ष्िकोण यखनत रय आंतरयक जगत भें
रबुलपश कयनत कयहफ कयहफ असंबल संबतलनत ह व लप एक गणणतऻ, एक तकप शतस्रस क बतंित फतत कयतप हैंव लप अय्‍ त् क बतंित फतत कयतप
हैं रय लप हैं हपयत‍रत् ज सप यह्‍ऩदशशीव

उनकप एक एक शब्द को सभझनप क कोलशश कयोव मह काठन होगतव मह काठन होगत ‍मों क उनक शब्दतलरह तकप क , रललप न क
ह , ऩय उनकत संकप त रबुपभ क ओय, भ्‍तस क ओय, ऩयभतत्भत क ओय ह व उनक शब्दतलरह उस ‍मक्‍त क ह जो ल ऻतिनक रबुमोगशतरत
भें कतभ कयतत ह , रप कन उनक रबुमोगशतरत आतंरयक अक््‍तत्ल क ह व अतव उनक शब्दतलरह ध लतयत रमिलभत न होओ, रय मह अन्बूित
फनतमप यहो क लप ऩयभ कत‍म कप गणणतऻ हैंव लप ्‍लमं एक रलयोधतबतस हैं, रप कन लप रलयोधतबतसस बतषत हयश्रगज रबुम्‍ त नहहं कयतपव कय
नहहं सकतपव लप फड़स भजफूत तकप संगत ऩषृ्ठबूलभ फनतमप यहतप हैंव लप रलचरपषण कयतप, रलच्छपदन कयतप, ऩय उनकत उध दपचम संचरपषण ह व लप
कप लर संचरपषण कयनप को हह रलचरपषण कयतप हैंव

तो हभपशत ध्मतन यखनत क ध्मपम तो ह ऩयभ सत्म तक ऩहं् नत, कप लर भतगप हह ह ल ऻतिनकव इसलरए भतगप ध लतयत ादग्रमिलभत भत
होनतव इसलरए ऩतंजलर नप ऩक्च भस भन को फह्त ्‍मतदत रबुबतरलत कमत ह व ऩतंजलर सद ल एक रबुबतल फनप यहप हैंव जहतं कहहं उनकत
नतभ ऩहं् त ह , लप रबुबतल फनप यहप ‍मों क त्भ उन्हें आसतनस सप सभझ सकतप होव रप कन उन्हें सभझनत हह ऩमतपपत नहहं ह व उन्हें
सभझनत उतनत हह आसतन ह क्जतनत क आइं्‍िहन को सभझनतव लप फ्ध श्रध सप फततें कयतप हैं, ऩय उनकत रक्ष्म रृदम हह ह व इसप त्म्हें
खमतर भें रपनत ह व

हभ एक खतयनतक ऺपत्र भें फढ़ यहप होंगपव अगय त्भ बूर जततप हो क लप एक करल बस हैं, तो त्भ भतगप सप फहक जतओगपव तफ त्भ
उनक शब्दतलरह को, उनक बतषत को, उनकप तकप को फह्त जड़तत सप ऩकड़ रोगप रय त्भ उनकप ध्मपम को बूर जतओगपव लप तहतप हैं
क तकप कप ध लतयत हह त्भ तकप कप ऩतय रप जतओव मह एक संबतलनत ह व त्भ तकप को इतनप गहयप तौय ऩय खसं सकतप हो क त्भ
उसकप ऩतय हो जतओव त्भ तकप ध लतयत रतप हौ, त्भ उसप ितरतप नहहंव त्भ तकप कत उऩमोग ससढ्रह क तयह कयतप हो तकप सप ऩतय जतनप
कप लरएव अफ उनकप शब्दों ऩय ध्मतन दोव हय शब्द को रलचरपरषत कयनत ह व

सॊप्रऻात सभाधध वह सभाधध है जो पवतकश पवचाय आनॊद औय अप्स्भता के बाव से मुक् त होती है?
लप सभतश्रध को, उस ऩयभ सत्म को, दो यणों भें फतंि दपतप हैंव ऩयभ सत्म फतंित नहहं जत सकततव मह तो अरलबत्‍म ह , रय ल्‍त्तव कोई
यण ह हह नहहंव रप कन भन को, सतधक को सहतमतत दपनप कप लरए हह लप ऩहरप इसप दो यणों भें फतंि दपतप हैंव ऩहरप यण को लप नतभ
दपतप हैं संरबुऻतत सभतश्रधव मह लह सभतश्रध ह , क्जसभें भन अऩनस शध् धतत भें स्यक्षऺत यहतत ह व

इस ऩहरप यण भें, भन को ऩरयष्कृत रय शध् ध होनत ऩड़तत ह व ऩतंजलर कहतप हैं, त्भ इसप एकदभ सप श्रगयत नहहं सकतपव इसप श्रगयतनत
असंबल ह ‍मों क अशध् श्रधमों क रबुलरृि ह श्र ऩकनप क व त्भ इसप कप लर तबस श्रगयत सकतप हो जफ भन कफरक्र शध् ध होतत ह इतनत
शध् ध, इतनत सूक्ष्भ क उसक कोई रबुलरृि नहहं यहतस श्र ऩकनप

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Page 245

रललश नहहं कमत जत सकतत कहहं रय फहनप कप लरएव माद त्भ रबुपभ नहहं कयतप, तो त्म्हतयप रबुपभ कत अबतल हह रलततन कत कोई
अन्संधतन फन सकतत ह व

फ्रतमि नप सत्म क फह्त—सस झर कमतं ऩतमसंव लह ल्‍त्तव हह एक अनूठत ‍मक्‍त थत, इसलरए फह्त सतयह अंतदृपक्ष्िमतं घाित ह्ईं उसपव
उसनप कहत थत क जफ कबस त्भ कसस सज भें गहयप उतयतप हो, तो लह होतत ह सस भें गहयप उतयनत हहव रय माद सस न लभरप, तो
त्भ कसस रय सज भें गहयप रूऩ सप उतयनप क कोलशश कयोगपव

त्भ शतमद दपश कप रबुधतनभंत्रस फननप क ओय फढ़नप रगोव

त्भ यतजनपततओ ंको रबुपभस कप रूऩ भें कबस नहहं ऩतओगपव लप हभपशत रबुपभ कत फलरदतन कय देंगप अऩनस सित—शक्‍त क खतितयव ल ऻतिनक
कबस न होंगप रबुपभस, ‍मों क माद लप रबुपभस हो जतमें तो लप रलितंत यहेंव उन्हें ताहए होतत ह तनतल, एक िनयंतय आलपशव रबुपभ रलितंित
अन्बल कयतत ह , िनयंतय आलपश संबल नहहं होततव लप ऩतगरों क तयह ज्िप यहतप हैं अऩनस रबुमोगशतरओ भेंव लप आरलष्ि होतप हैं, कतभ
ध लतयत अलबबूत होतप हैंव यतत—ादन लप कतभ कयतप यहतप ह व

इितहतस जतनतत ह क जफ कसस दपश क रबुपभ—आलचमकतत ऩरयऩूणप हो जततस ह , तो दपश कभजोय हो जततत ह व तफ लह ऩयतक्जत कमत
जत सकतत ह व इसलरए रबुपभ क तह ऩरयऩूणप नहहं होनस ताहएव तफ दपश खतयनतक हो जततत ह ‍मों क हय कोई ऩगरतमत ह्आ होतत ह
रय रड़नप को त मतय यहतत ह व जयत—सत कतयण ऩतकय हह हय कोई त मतय हो जततत ह रड़नप कप लरएव माद रबुपभ क आलचमकतत ऩूयह हो
जततस ह तो कसप ऩयलतह यहतस ह ? जयत सो नत, माद लत्‍तल भें हह सतयत दपश रबुपभ भें ऩड़ गमत हो रय कोई आक्रभण कय दपव तो उस
दपश कप रोग उससप कहेंगप ठऺक ह , त्भ बस आ जतओ रय यह जतओ महहंव ‍मों ऩयपशतनस उठत यहप हो! हभ इतनप स्खस हैं, तो त्भ बस आ
जतओव दपश फह्त रलशतर ह , तो त्भ बस आ जतओ महतं रय स्खस फनोव रय माद त्भ शतसक हह होनत तहतप हो तो हो जतओ शतसकव
क्छ गरत नहहं, मह ठऺक ह हहव त्भ रप रो क्जम्भपदतयहव मह अच्छत ह व

रप कन जफ रबुपभ क आलचमकतत ऩरयऩूणप नहहं होतस ह , तफ त्भ हभपशत रड़नप को हह त मतय यहतप होव त्भ जयत खमतर भें रपनत मह
फततव अऩनप भन को हह दपखनप कत रबुमत्न कयनतव माद त्भनप क्छ ादन अऩनस सस सप रबुपभ नहहं कमत होतत, तो त्भ िनयंतय श्र ड़श्र ड़प
यहतप होव माद त्भ रबुपभ कयतप हो, तो त्भ रलितंित भें होतप होव श्र ड़श्र ड़तहि रह जततस ह व रय त्भ इतनत ठऺक अन्बल कयतप हो क
त्भ ऺभत कय सकतप होव रबुपभस हय फतत कप लरए ऺभत कय सकतत ह व रबुपभ एक गहन आशसष फनत ह उसकप लरएव तो लह सफ ऺभत कय
सकतत ह जो गरत ह व

नहह,ं नपतत त्म्हें रबुपभ नहहं कयनप देंगप ‍मों क पय लसऩतहह िनलभपत नहहं कमप जत सकतपव तफ त्भ कहतं ऩतओगप म्ध धखोयों को, रलक्षऺपत
रोगों को, ऩतगर रोगों को जो क रलध्लसं हह कयनत तहेंगप? रबुपभ सजृन ह व माद रबुपभ क आलचमकतत ऩरयऩूणप हो जततस ह , तो त्भ
सजृन कयनत तहोगप, रलध्लंस नहहंव तफ सतयत यतजन ितक ढतं त हह ढह जतमपगतव माद त्भ रबुपभ कयतप हो, तो पय सतयत ऩतरयलतरयक ढतं त
सभग्र रूऩ सप अरग होगतव माद त्भ रबुपभ कयतप हो तो अथप‍मल्‍थत रय अथपशत्‍त्र अरग होंगपव ल्‍त्तव माद रबुपभ आनप ादमत जतमप, तो
सतयत संसतय सभग्रतमत अरग हह रूऩ रप रपगतव रप कन उसप आनप नहहं ादमत जत सकतत ‍मों क इस ढतं प कप अऩनप न्म्‍त ्‍लतथप हैंव हय
ढतं त ्‍लमं को आगप क ओय धकप रतत ह , रय माद त्भ क् रप जततप हो तो लह ऩयलतह नहहं कयततव

सतयह भतनलतत क् रह गमस ह , रय सभ्मतत कत यथ रतत रत जततत ह व इसप सभझो, इसप दपखो, जतगरूक हो जतओ इसकप रबुितव रय
पय रबुपभ इतनत ससधत—सतप होतत ह व क्छ रय ्‍मतदत ससधत नहहं होतत उससपव सतयह सतभतक्जक आलचमकततएं श्रगयत दपनत—लसपप त्म्हतयह
आतंरयक आलचमकततओ ंकत ध्मतन यखोव मह कोई सभतज कप रलरुध ध हो जतनत नहहं ह व त्भ तो फस त्म्हतयप अऩनप जसलन को सभधृ ध
कयनप क कोलशश हह कय यहप होव त्भ महतं कसस दसूयप क अऩपऺतएं ऩूयह कयनप को नहहं होव त्भ महतं हो त्म्हतयप अऩनप लरए, त्म्हतयह
अऩनस ऩरयऩूणपतत कप लरएव

रबुपभ को रबुथभ सज रपनत, भौलरक आधतय रय दसूयह सजों क ऩयलतह भत कयनतव ऩतगर रोग त्म्हतयप तयों ओय ह व लप त्म्हें ऩतगरऩन
क तयप धकप रेंगपव सभतज कप रलरुध ध हो जतनप क कोई जरूयत नहहं ह व भतत्र फहतय आ जतनत इसक अऩपऺतओ ंसप, फस इतनत हहव

रल्ोहह होनप क , क्रतंितकतयह होनप क त्म्हें कोई जरूयत नहह, ‍मों क ल सत कयनत पय सप उसस जगह आ जतनत ह व माद त्म्हतयत रबुपभ
ऩरयऩूणप नहहं होतत ह तो त्भ क्रतंितकतयह हो जतओगप, ‍मों क लह बस िछऩप रूऩ भें एकरलध्लंस हह होतत ह व रय पय आतस ह लत्‍तरलक
सभ्‍मत—त्म्हतयप अऩनप अहंकतय को श्रगयत दपनप क व रबुपभ तहतत ह संऩूणप सभऩपणव

इसप होनप दपनत, ‍मों क क्छ रय नहहं ह जो त्म्हें घि सकतत होव माद त्भ इसप नहहं घिनप दपतप हो तो त्म्हतयत जसनत ‍मथप ह व रय
माद त्भ इसप घिनप दपतप हो, तो रय फह्त—सस सजप संबल हो जततस हैंव एक फतत दसूयह फतत तक रप जततस ह व रबुपभ सदत रबुतथपनत क
रय रप जततत ह व इससलरए जससस जोय दपतप ह क ऩयभतत्भत रबुपभ ह व

आज इतना ही
ऩहरा बाग सभात त।


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